मंगलवार, 4 अगस्त 2009

सूखाग्रस्त प्रदेश में क्या यह सही है ???.....


उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के वित्तमंत्री लालजी वर्मा ने विधानसभा में जो वित्त विधेयक प्रस्तुत किया है उसमें उन्होंने प्रस्ताव किया है कि राज्य में मूर्तियों के विकास के लिए 550 करोड़ खर्च किया जाएगा जबकि बुंदेलखण्ड में सूखे से निपटने के लिए महज 6.5 करोड़ रूपये खर्च का प्रावधान किया है.
प्रदेश में मूर्तियां लगवाने के लिए मायावती की चाहे जितनी आलोचना हो रही हो लेकिन मायावती सरकार और अधिक मूर्तियां लगवाने पर दृढ़ है. प्रदेश सरकार का वित्त विधेयक प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री लालजी वर्मा ने प्रदेश विधानसभा को बताया कि मूर्तियों, स्मारकों और पार्कों के लिए सरकार को 550 करोड़ रूपये अतिरिक्त चाहिए। वित्त विधेयक प्रस्तुत करते हुए लालजी वर्मा ने कहा है कि जेल रोड पर बन रहे कांशीराम मेमोरियल के लिए 19.81 करोड़ और 35.73 करोड़ की अतिरिक्त राशि चाहिए. मई 2007 में सत्ता में आने के बाद मायावती सरकार इस मेमोरियल पर 370 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है. इसी तरह कांशीराम उपवन के बगल में प्रस्तावित इको पार्क के लिए सरकार ने 199 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है. यह इको पार्क लखनऊ जेल को गिराकर उसी जमीन पर तैयार किया जाएगा.
कांशीराम उपवन के लिए सरकार को 57.80 करोड़ रूपया चाहिए. जबकि रामबाई अंबेडकर मैदान के लिए सरकार ने 56.30 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है. इसी तरह गोमती नगर स्थित अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के लिए सरकार ने 57.67 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है. अंबेडकर मेमोरियल जिसे अंबेडकर पार्क के नाम से जाना जाता है मायावती ने 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद ही काम शुरू किया था जिस पर अभी भी काम चल रहा है. इस पार्क पर अब तक सरकार 3000 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है.
अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल और जेल रोड पर प्रस्तावित कांशीराम मेमोरियल के सरकार जो मूर्तियां गढ़वाना चाहती है उसके लिए 26.75 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है. इन सब खर्चों के अलावा लखनऊ के विकास के लिए सरकार ने 100 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के जजों के लिए 25 होण्डा सिटी कारें खरीदने के लिए 2.03 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव किया गया है.
इसके साथ ही सरकारी धान और गेहूं की खरीद के लिए सरकार ने 4800 करोड़ और विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर जमीन अधिग्रहण के लिए 173।5 करोड़ रूपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है.
[साभार : विस्फोट . काम]

सोमवार, 13 जुलाई 2009

झाडी ताल शारदा के निशाने पर


किशनपुर सेंचुरी का झाडी ताल यूपी के राष्ट्रीय पशु बारहसिंघा का प्रमुख वासस्थल है , यह शारदा नदी के निशाने पर है । सिंचाई विभाग धन के बंदरबांट में लगा है । जिससे झाडी ताल के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

दुधवा के हिरन


दुधवा के किशनपुर वनपशु बिहार के झाडी ताल में हिरन घुमते हैं आजकल यह ताल शारदा नदी के निशाने पर है । सिचाई विभाग द्वारा बनाई जा रही ठोकरें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं है ।

बुधवार, 22 अप्रैल 2009

लखीमपुर-खीरी से प्रकाशित हो गया है


लखीमपुर-खीरी से शुरू हो गयाब्लैक टाईगरसांध्य दैनिक२२।०४।२००९ अंक २७ यू।पी के सभी शहरों में संवाददाताओं की आवश्यकता है संपर्क :mo. ९४१५१६६१०३

सोमवार, 23 मार्च 2009

लखीमपुर से शीघ्र प्रकाशित सांध्य दैनिक


यू पी के जिला लखीमपुर के सुधी पाठकों की जरूरत को देखते हुए

सांध्य दैनिक ब्लैक टाइगर

का प्रकाशन यथाशीघ्र किया जा रहा है ।

इसके लिए आप सभी प्यार व सहयोग देकर हमें आगे बड़ने का अवसर प्रदान करें ।

साथ में सामायिक लेख एवं रचनाएँ भी सादर आमंत्रित हैं ।

हमारा पता

$ लखीमपुर-
पुराना सेल्स टैक्स आफिस
आनंद टाकिज रोड
मो० ९७९२४६९५११

$ गोलागोकर्णनाथ-
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पंजाबी मार्केट
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पालिका काम्प्लेक्स
नगर पालिका रोड
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ई-मेल पता-E-mail : dailyblacktiger@gmail.com

बुधवार, 18 मार्च 2009

हिरन बच्चे को मिला नया घर


जंगल से भटक कर आए एक हिरन के बच्चे को लोगों ने पकड़ लिया बाद में उसे दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन परिसर में पहुच कर विश्व प्रक्रति निधि के मुदित गुप्ता तथा पत्रकार डीपी मिश्रा, सोरभ ने बच्चे को जंगल में छोड़कर उसे नया घर में पहुंचा दिया । मालूम हो की जंगल में घास के मैदान उचित प्रबन्धन न होने के कारण बेकार होने लगे हैं इसके कारण बनस्पति आहारी वन्यजीव चारा की तलाश में बाहर आने को बिवश हैं। जहाँ उनका लोग अवैध शिकार करके मार डालते हैं। इस अब्यवस्था के कारण जंगल में वन्यजीवों की कमी ओर उनके बाहर रहने से बनराज बाघ भी जंगल के बाहर आने को बिवश हैं।

सोमवार, 2 मार्च 2009

Check out Bonus Program

Hi,

I want you to take a look at: Bonus Program 

बाघ को पकड़ने वाली जंगलात की टीम


लखीमपुर के कापतादा में पिजडे में कैद हुआ बाघ


लखीमपुर में पकडा गया बाघ क्या आतंकी ही है ????

बेहोश बाघ का निरीछण करते डा तालुकेदार
लखीमपुर खीरी की साउथ फारेस्ट डिविजन की भीरा रेंज में पिछले दो माह से आतंक का पर्याय बन चुके बाघ को 01.03.2009 की शाम को टैंकुलाईजर करके पिंजडे में कैद कर लिया गाया है. इस बाघ को चार मानव हत्ताये करने के जुर्म में मुख्य वन सरछक वन्यजीव वीके पट्नायक द्वारा मौत की सजा दी गई थी. इसके तहत चलाए गए मिशन टाइगर के तहत आज सुबह जब बाघ ने एक पड्डे का शिकार करके खाया ओर चला गाया इसके बाद की गई नाकाबंदी का परिनाम यह निकाला कि शाम को वह जब दूसरी बार मांस खाने आया तो पहले से घात लगाकर बैठे ड्ब्ल्यूटीआई के एक्सपर्ट डा अनाज्न तालुकेदार ने उसे टैंकुलाईजर गान से बेहोश कर दिया. इससे बाघ को मिलीं मौत की सजा उम्रकैद में बदल गई है. इस सफलता पर वन्यजीव प्रेमियों ने खुशी का इज़हार किया है। जबकि ग्रामीणों ने भी राहत की साँस ली है.
लेकिन क्या यह वही बाघ पकड़ा गया है । इस लोग संदेह ब्यक्त कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि आतंकी हमलावर बाघ इससे कद्दावर था यह तो उसके सामने बच्चा लग रहा है । विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले की जांच होने के बाद ही सही सिथति का पता लग पाएगा .

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

फैजाबाद में मारा गया बाघ है या बाघिन ??????


इसे यूपी का दुर्भाग्य कहा जाए या फिर वन विभाग के अफसरों की नाकाबिलियत का नमूना माना जाए कि वह तीन माह में यह पता नहीं पाए कि पीलीभीत से फ़ैज़ाबाद तक घूमने वाला बाघ नर है या मादा ? इसका खुलाशा हुआ है 25.02.2009 को बरेली के आई.बी.आर.आई. में पोस्टमार्टम के दौरान कि फ़ैज़ाबाद में 24.02.2009 को शिकारी नवाब की गोली से मारा गया आदमखोर बाघ नहीं वरन बाघिन थी.उल्लेखनीय है माह नवंबर 2008 के प्रथम सप्ताह पीलीभीत के जंगल से निकाला बाघ साउथ खीरी के जंगल के साथ शाहजहांपुर से होता हुआ सीतापुर्, बाराबंकी फिर लखनऊ और उसके बाद फ़ैज़ाबाद तक पहुँच गया. इस दौरान तमाम स्थानों से उसके पंजों के निशान मिलें उनके फुटप्रिंट तैयार करके उनका मिलान भी किया गया. उधर मानव हत्तायाऑ का दोषी मानकर बाघ को आदमखोर घोषित किया गया. इससे पूर्व ओर बाद में चलाए गए मिशन टाइगर में यूपी बन महकमे के डी.एफ.ओ. पीलीभीत, साउथ-खीरी, सीतापुर्, लखनऊ, दुधवा, कतर्नियाघाट, फ़ैज़ाबाद डी. एफ. ओ. आदि तमाम छोटे बड़े अफसरों समेत सैकडॉ कर्मचारियों के साथ ही अवध प्रांत के मुख्य वन संरछ्क ने पंजो के निशानों को देखा ही साथ में यूपी में विभाग के सबसे बड़े अफसर प्रमुख वन संरछक [वन्यजीव] ने भी शायद उन पंजो को देखा होगा. उसके बाद भी यह सभी आला अफसर यह पता नहीं लगा सके कि मौत की सजा से बचकर भाग रहा बाघ नर है मादा. ? यह सिथति आपने आप में ही दुर्भाग्यपूर्ण कहीं जाएगी. ..फिलहाल बन विभाग के नाकाबिल ओर नकारा हो चुके बनाधिकारियो की कार्यशैली के कारण एक बाघ असमय कलकवलित हो गया है. वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि वन विभाग द्वारा अगर सार्थक प्रयास किए जाते तो शायद इस बाघ को लखनऊ पहुचने से पहले ही रोक कर टैंकुलाइजर कर पकड़ा जा सकता था या हांका लगाकर वापस भी किया जा सकता था. लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया ? यह आपने आप में ही बिचारणीय प्रश्न है. ओर इसकी गहन जाँच की भी आवश्यकता है.गौरतलब यह भी है कि आदमखोर बाघ को पकड़ने के किए चलाए गए टाईगर मिशन पर सरकार का करोडो रुपया खर्च को चुका है. वह भी अफसरों की नाकाबिकियत के कारण. इसकी उन अफसरों के रिकवरी होनी चाहिए साथ ही इस पूरे मामले की जाँच भी सी.बी.आई से होनी भी आवश्यक है. ताकि दोषी अफसरो को सजा मिल सके ताकि अफसर भी इससे सीख ले सके. ओर आगे कोई बाघ साज़िश का शिकार होकर मौत की सजा न पा सके. बन विभाग के ही सूत्रो का कहना है कि पीलीभीत के जंगल से बाघ निकाला था इसकी रिपोर्टिंग भी हुई थी फिर यह बाघिन कैसे हो गई ? इसकी भी गहन जाँच की आवश्यकता है. अगर छानबीन हो जाए तो एक बहुत बड़ी साज़िश का खुलाशा हो सकता है इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है.{लेखक स्वतंत्र पत्रकार एव वाइल्ड लाईफर है}




शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

अफसारो की नाकामी से बाघ बन रहें हैं आदमखोर


लखीमपुर जिले के साउथ फारेस्ट डिविजन की भीरा रेंज के ग्राम कापटांडा के आसपास चार मानव हत्या करने वाला बाघ यूपी के वन बिभाग के अफसरों की नाकामी और असफलता की सलीब पर चड्कर 20 फरवरी 2009 को मौत की सजा पा चुका है. अब बन बिभाग के ही लोग जो बाघों के रछक थे वही उसे गोली मार कर मौत की नींद सुलाने के लिए बाघ को खोज रहें है.जबकि दो माह पहले किशनपुर वन पशु बिहार के जंगल से बाहर आए इस बाघ को अगर प्रयास किए जाते तो इसे वापस जंगल में भेजा सकता था लेकिन बनाधिकारियो कोई भी ऐसा सार्थक प्रयास नहीं किया. परिणाम बाघ जंगल में भोजन की हुई कमी के कारण खेत में झुकाकर कम कराने वालों को चोपाया समझकर मानव पर हमला शुरु किया और फिर खूंखार बन कर चार मानव ही हत्या करके बाघ आदमखोर बन गया. इसके बाद भी उसे पकड़ने के अथवा बेहोश करने के सार्थक प्रयास नहीं किए गए और बाघ को मानाव के लिए खतरनाक घोषित करके मुख्य वन संरछक वन्यजीव बीके पटनायक ने बाघ को गोली मरने का आदेश जारी कर दिया है. एक तरफ़ पूरा विश्व बाघ संरछण की बात कर रहा है और यूपी के अफसर अपनी नाकामी पर परदा डालने के लिए मानव हत्या का सहारा लेकर यूपी के जंगलों से बाघोन का सफाया कराने से परहेज़ नहीं कर रहे हैं. इससे पहले भी बिभागीय अफसरों की सुस्ती से पीलीभीत के जंगल से निकाला बाघ लखनऊ तक पहुँचा अब वह फ़ैज़ाबाद के आसपास अपनी जान बचता घूम रहा है. इस बाघ को भी बीच में रोक कर जंगल में वापस किया जा सकता था लेकिन यह न करके अपनी नाकामी की चादर की आड़ लेकर इस बाघ को भी मौत की सजा दिलवाने में सफल रहे थे. आख़िर यह कब तक चलेगा. यह स्वयं में बिचारणीय प्रश्न बन गया है. बाघों को आदमखोर घोषित करने से पहले क्या अध्ययन किया जाता है. शायद नही, क्योकि कांपटांडा वाले बाघ में कागजो पर बने गई कमेटी ने बाघ की मौत के फरमान की सिफारिश कर दी थी. यह क्रूर मजाक बाघ के जीवन के साथ क्यों किया गया इसमें साज़िश की स्पस्ट बू आ रही है.भ्रस्टाचार और अफसरों की नालायकी के कारण यूपी में प्रोजेक्ट टाईगर असफलता की डलान पर चल रहा है. तीस साल में अरबों रुपया खर्चने के बाद भी बाघों की संख्या बडने के बजाय घाट ही रही है. आख़िर क्यों ? कहीं न कहीं सिस्टम में झोल है. और नाकाम बनाधिकारी इस पर परदा डाल रहें हैं. राजस्थान का सारिस्का नेशनल पार्क इसका जीता जागता उदाहरण है. वहाँ भी बनाधिकारियो की ही नाकामियों के चलते बाघ गायब हो गए थे. अब यही साज़िश दुधवा नेशनल पार्क के बाघों के साथ रची जा रही है. बाघ जंगल के बाहर क्यों आते हैं इस पर शोध क्यों नहीं किए जा रहें. बिड्म्बना यह है कि दुधवा प्रशासन किसी को इसकी इजाजत भी नहीं देते है. ऐसा क्यो किया जाता है. इसकी जाँच होनी चाहिए. फिलहाल बाघ को मार देना क्या समस्या का स्थाई समाधान है. जवाब होगा शायद नहीं ? और आगे भी कोई बाघ आदमखोर नहीं बनेगा. इसकी भी कोई गारन्टी नहीं है. ऐसी दशा में अब यह आवश्यक हो गया है कि प्रोजेक्ट टाइगर की समीछा की जाए. और मानव तथा वन्यजीवों के बीच बड रहे संघर्श को नई परिभाषा दी जाए ताकि दोनों अपनी सीमाओं में सुरछित जीवन ब्यतीत कर सकें. अन्यथा की सिथति में परिणाम खतरनाक ही निकलेगे. जिसका खामियाजा दोनो को भुगतना पडेगा.,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,डीपी मिश्रा

मोहताज़ नही प्यार

PYAR kisi ek din ka mohtaaz nhi hota. payar kisi kagaz par likhe shabdo mai nhi hota pyar kisi fool ki khushboo mai bhi nhi hota pyar gift paane ya dene ka nam nhi ..................pyar do dilo ka ,aatmao ka milan hota hai ,kagaz par likhe shabd kisi khas din mai adhik mahatav nhi rakhte ,kisi khas din mai fool ki khushboo nhi barh jati ...............pyar ko mahssus karna hota hai , pyar ka ahsas jaruri hai ....................... aaj pyar sabji bhaji ki tarah sab log bechege n kharidege ..chand fullo,greetings ya gifts ke sath pyar nhi barega .pyar ko barane ke liy aapki bhavnai ki kafi hai, jise tumse sachcha pyar hai wo aaj is valentine day ka mohtaj nhi .......................... aap chahe jitne logo ko happy valentine day kahe .but sorry to say mai kisi spl din mai vishwas nhi karti .mera pyar anmol hai ,unique hai ..mai aaj unko isliy pyar wish nhi karungi k aaj spl din hai balki mai to har din har waqt pyar karti hu unse, mera pyar samay ya tarikh ka nhi sochta .pyar ka ahsas n bhavnao ki tivrta bas pyar prakat karne ka andaaz badal deti hai jo
muze hai pasand mai wo karti hu ........ aapko jo pasand hai wo aap kare.................